Monday, 23 August, 2010

जीवन.....

 जीवन तुम्हारा है
जीवन का भी क्या समझना है
खुद को लेकर ही  भटकना  है`||

खुद को ही खुद जानते नहीं  है
तो संसार को क्या समझना है|| 

जीवन है मिलना आग-पानी का
कभी  पीना तो कभी जलना  है ||

फूलों  से  सीखो  जीने के  लिए
जिनका औरो के लिए महकना है||

सच्चाई जीवन की आखिर यही है
इस जिस्त को अज़ल में बदलना है ||

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