Wednesday, 5 January, 2011

आत्मा- शरीर संवाद

आत्मा :-  माँगा नहीं गया , तुझे सौंपा गया है
              मालिक बना तु जिस दिन , तेरे
              पाँच तत्वों को , मिटटी में मिला दुँगी ||

शरीर  :-  मिटटी में मिला देगी  , पर होगी आत्महत्या
             जग तो यही कहेगा , जैसा की सुनता हूँ  मैं ||

आत्मा :- होती है अमर आत्मा , होती नहीं है हत्या
             डरना तो तेरा होगा , मैं  डरी  तो मिथ्या ||

शरीर  :-(मोह छल )
            व्यंग ना भी मारो , यूँ वक़्त ना गुजारो
            हम तुम तो एक ही है ये बात तो विचारो |

            कफस * तु  मेरा नहीं , मुझ  मैं फंसी है तु 
            ना बच सका था अर्जुन , ना बच सकेगी तु ||
आत्मा :- ऐ नाशवान देह ,   अहंकार  मैं न  रह 
            पलके झपकाने भर की शक्ति बची ना होगी 
            छोडूंगी जिस दिन तुझ को, तेरा हाल क्या क्या होगा ||

शरीर :-  (समझते हुए )
            कर्मो के लिए ही जोड़ा , तुझ  से जो मेरा नाता 
            मालिक सदा थी तु ही , मुझको ये समझ आता |

आत्मा :- (संदेश )
             शरीर में रहने वाली ऐ देव आत्माओं 
             क्या मालिक हो तुम वहाँ की 
             ये प्रशन  मैं हूँ दोहराता 
             अभद्रिता  ना करो , ऐ भद्र  आत्माओं
             कर्म ही में अपनी वैचारिक शक्ति लगाओ ||

  *पिंजरा       

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